घर 4 दीवारी से नहीं 4 जनों से बनता हैपरिवार उनके प्रेम और तालमेल से बनता है सभी कार्यों को जोड़ कर साधना, सफल गृहणी का काम है नौकरीवाली से पैसा बनेगा/घर नहीं प्रभाव और दुर्भाव में, आधुनिक/पारिवारिक तालमेल से उत्तम घर परिवार से देश आगे बड़े रसोई, बच्चों-परिवार की देख भाल, गृह सज्जा के बीच अपने लिए भी ध्यान देती शिक्षित नारी-(निस्संकोच ब्लॉग पर टिप्पणी/अनुसरण/ निशुल्क सदस्यता व yugdarpan पर इमेल/चैटकरें, संपर्कसूत्र- तिलक संपादक युगदर्पण 09911111611, 9999777358.

बिकाऊ मीडिया -व हमारा भविष्य

: : : क्या आप मानते हैं कि अपराध का महिमामंडन करते अश्लील, नकारात्मक 40 पृष्ठ के रद्दी समाचार; जिन्हे शीर्षक देख रद्दी में डाला जाता है। हमारी सोच, पठनीयता, चरित्र, चिंतन सहित भविष्य को नकारात्मकता देते हैं। फिर उसे केवल इसलिए लिया जाये, कि 40 पृष्ठ की रद्दी से क्रय मूल्य निकल आयेगा ? कभी इसका विचार किया है कि यह सब इस देश या हमारा अपना भविष्य रद्दी करता है? इसका एक ही विकल्प -सार्थक, सटीक, सुघड़, सुस्पष्ट व सकारात्मक राष्ट्रवादी मीडिया, YDMS, आइयें, इस के लिये संकल्प लें: शर्मनिरपेक्ष मैकालेवादी बिकाऊ मीडिया द्वारा समाज को भटकने से रोकें; जागते रहो, जगाते रहो।।: : नकारात्मक मीडिया के सकारात्मक विकल्प का सार्थक संकल्प - (विविध विषयों के 28 ब्लाग, 5 चेनल व अन्य सूत्र) की एक वैश्विक पहचान है। आप चाहें तो आप भी बन सकते हैं, इसके समर्थक, योगदानकर्ता, प्रचारक,Be a member -Supporter, contributor, promotional Team, युगदर्पण मीडिया समूह संपादक - तिलक.धन्यवाद YDMS. 9911111611: :
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Tuesday, October 18, 2016

तीन तलाक प्रथा से महिला अस्मिता को क्षति: नायडू

तीन तलाक प्रथा से महिला अस्मिता को क्षति: नायडू 
तीन तलाक प्रथा से महिलाओं को नुकसान: नायडूकोच्चि। देशभर में ‘तीन तलाक’ के मुद्दे पर चल रही चर्चा के बीच केंद्रीय मंत्री वैंकेया नायडू ने आज कहा कि यह प्रथा बंद होनी चाहिए क्योंकि यह महिला अस्मिता को क्षति पहुंचा रही है। शहरी विकास मंत्री ने कहा कि विधि आयोग और उच्चतम न्यायालय ने तीन तलाक की प्रथा पर जनता से राय मांगी है और चर्चा कराने की बात कही है। नायडू ने कहा, ‘‘चर्चा के बाद भारत सरकार ने यह मत दिया है कि तीन तलाक महिलाओं के हित में नहीं है। इसे समाप्त होना चाहिए।’’ 
नायडू का यह वक्तव्य इस दृष्टी से महत्वपूर्ण है कि ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्यों समेत कई मुस्लिम संगठन और नेता इस बात पर बल दे रहे हैं कि ‘‘शरिया कानून बदला नहीं जा सकता।’’ केंद्र सरकार को तीन तलाक के मुद्दे पर जनमत संग्रह कराने की सलाह देते हुए ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के जफरयाब जिलानी ने दावा किया था कि 90 % मुस्लिम महिलाएं शरिया कानून का समर्थन करती हैं। गत सात अक्तूबर को केंद्र ने उच्चतम न्यायालय में मुस्लिमों में जारी तीन तलाक, निकाह हलाला और बहुविवाह प्रथाओं का विरोध किया था और लैंगिक समानता एवं धर्मनिरपेक्षता के आधार पर इन पर पुनर्विचार करने की वकालत की थी। 
कानून एवं न्याय मंत्रालय ने अपने शपथपत्र में लैंगिक समानता, धर्मनिरपेक्षता, अंतरराष्ट्रीय नियमों, धार्मिक प्रथाओं और विभिन्न इस्लामी देशों में मार्शल लॉ का उल्लेख करते हुए कहा कि शीर्ष न्यायालय को तीन तलाक और बहुविवाह के मुद्दे पर नए सिरे से निर्णय देना चाहिए। 
घर 4 दीवारी से नहीं 4 जनों से बनता है,
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आओ मिलकर इसे बनायें; - तिलक