घर 4 दीवारी से नहीं 4 जनों से बनता हैपरिवार उनके प्रेम और तालमेल से बनता है सभी कार्यों को जोड़ कर साधना, सफल गृहणी का काम है नौकरीवाली से पैसा बनेगा/घर नहीं प्रभाव और दुर्भाव में, आधुनिक/पारिवारिक तालमेल से उत्तम घर परिवार से देश आगे बड़े रसोई, बच्चों-परिवार की देख भाल, गृह सज्जा के बीच अपने लिए भी ध्यान देती शिक्षित नारी-(निस्संकोच ब्लॉग पर टिप्पणी/अनुसरण/ निशुल्क सदस्यता व yugdarpan पर इमेल/चैटकरें, संपर्कसूत्र- तिलक संपादक युगदर्पण 09911111611, 9999777358.

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बिकाऊ मीडिया -व हमारा भविष्य

: : : क्या आप मानते हैं कि अपराध का महिमामंडन करते अश्लील, नकारात्मक 40 पृष्ठ के रद्दी समाचार; जिन्हे शीर्षक देख रद्दी में डाला जाता है। हमारी सोच, पठनीयता, चरित्र, चिंतन सहित भविष्य को नकारात्मकता देते हैं। फिर उसे केवल इसलिए लिया जाये, कि 40 पृष्ठ की रद्दी से क्रय मूल्य निकल आयेगा ? कभी इसका विचार किया है कि यह सब इस देश या हमारा अपना भविष्य रद्दी करता है? इसका एक ही विकल्प -सार्थक, सटीक, सुघड़, सुस्पष्ट व सकारात्मक राष्ट्रवादी मीडिया, YDMS, आइयें, इस के लिये संकल्प लें: शर्मनिरपेक्ष मैकालेवादी बिकाऊ मीडिया द्वारा समाज को भटकने से रोकें; जागते रहो, जगाते रहो।।: : नकारात्मक मीडिया के सकारात्मक विकल्प का सार्थक संकल्प - (विविध विषयों के 28 ब्लाग, 5 चेनल व अन्य सूत्र) की एक वैश्विक पहचान है। आप चाहें तो आप भी बन सकते हैं, इसके समर्थक, योगदानकर्ता, प्रचारक,Be a member -Supporter, contributor, promotional Team, युगदर्पण मीडिया समूह संपादक - तिलक.धन्यवाद YDMS. 9911111611: :

Monday, August 1, 2022

❤️🙏 मेरी #पुष्पांजलि 🙏❤️

❤️🙏 मेरी #पुष्पांजलि 🙏❤️ 

*विनीत नमन* #माता सुशीला देवी रेलन 90 वीं वर्षगांठ की स्मृति में - 4 अग 2022
मैं जो भी लिखता हूं, समाज में करता हूं, #मां तेरे #संस्कारों का प्रताप ही तो है। 
तेरा पोता मोहित भी अच्छे पद पर आसीन होकर, #पर्यावरण संरक्षण का 'गैससं' आरम्भ किया है। वो नदी #स्वच्छता और #वृक्षारोपण से भौतिक शुद्धी अभियान चला रहा है। जबकि मैं दो दशक से #वैचारिक शुद्धता का अभियान चला रहा हूं। 

#माँ, मेरी माँ, (एक #आदर्श जीवन) 
#माता #सुशीला देवी #रेलन की स्मृति में - जीवन यात्रा 90 वर्ष पूर्व, 4 अगस्त 1932 से आरंभ होकर 27 वर्ष पूर्व, 17 मई 1995 तक भारी #संघर्षशील चली। 

वैसे तो माँ चाहे किसी की भी हो, बस माँ ही होती है। माँ, जो गर्भ से मृत्यु तक, हर पल अपने #बच्चों के हर दुःख सुख की साथी! जिसकी गोद, हर पीड़ा का हरण करती है। अपने बच्चों की वो भगवान होती है। क्योंकि जब किसी भी कष्ट में होने पर, भगवान के बाद एक वही होती है, जिस पर हम सबसे अधिक आस लगा सकते व रखते हैं। 
माँ, तो बस माँ होती है, बच्चों में उसकी जाँ होती है। मेरी माँ तो वास्तव में सबसे निराली थी। उतनी ही #निराली थी, उसकी #जीवन गाथा। 
आपके जीवन की यात्रा जो 90 वर्ष पूर्व, 4 अगस्त 1932 से आरंभ होकर 27 वर्ष पूर्व, 17 मई 1995 तक चली। कठोर कष्ट झेलती रही, किन्तु #सहनशील जीवन के अंत तक #अनुकरणीय #अविस्मरणीय। 

बचपन ही नहीं आज भी, वृद्धावस्था में भी जीवन प्रयन्त, हर पल जब भी तुझे मैं स्मरण करता हूँ, भाव विहल हो जाता हूँ। माँ, तूं स्मरण बहुत आती है, .... 

तत्कालीन जीवित 5 भाई बहनों में सबसे बड़ी, एवं प्रभाकर शिक्षित अति विनम्र मृदु भाषी होने व सबसे स्नेह रखने वाली, होने के कारण  अपने पास पड़ौस में सबके सम्मान की पात्र रही। 
साथ ही हमारे नानके, एवं दादके परिवार, विभाजन के उस काले साये की #विभीषिका से निकल, संभल चुके थे, किन्तु हमारे माता पिता दोनों के ही परिवारों ने किसी भी उपदान पर आश्रित नहीं होने व कठोर जीवन जीने का मार्ग चुना था। 
यही कारण था कि अपने माता पिता को हमने, सदा  *कठोर जीवन* का अनुपम उदहारण प्रस्तुत करते पाया। संभवत: यही संस्कार की सशक्त कड़ी बन कर उभरती है। 
ये तेरे #पुनीत संस्कार ही तो हैं, मेरा भाई अपनी भाभी का लक्ष्मण है। और हम सब बहु को बेटी और दामाद को पुत्रवत स्नेह करते हैं। -तिलक  

17, मई 2015 आज 20 वीं पुण्य तिथि पर श्रद्धा सुमन 

  

20 वीं पुण्य तिथि पर श्रद्धा सुमन

स्व. सुशीला देवी रेलन जी, की 20 वीं पुण्य तिथि ज्येष्ठ कृष्ण चतुर्दशी रविवार 17 मई 2015. 20 वर्ष पूर्व आपने नश्वर शरीर त्याग दिया, किन्तु हमारे ह्रदय मंदिर में आप सदा ही #विराजमान रही हैं। गत् 23 नवं 2021, पिता श्री भी तेरे धाम को प्रस्थान कर गए। हम सब आप दोनों को श्रद्धा सुमन अर्पित करते हैं।  

माँ, जो गर्भ से मृत्यु तक, हर पल अपने बच्चों के हर दुःख सुख की साथी, जिसकी गोद हर पीड़ा का हरण करती है। माँ तो बस माँ होती है, बच्चों में उसकी जाँ होती है। 

#बचपन ही नहीं #वृद्धावस्था व् जीवन के अंत तक हर पल जब भी तुझे स्मरण करता हूँ भाव विहल हो जाता हूँ। माँ, तेरी याद बहुत आती है, .... 
अब मेरे दामाद सिद्धार्थ, दो नाती आद्विक व एक नन्हा कीष् भी हो गए; पर माँ, तूं स्मरण बहुत आती है।।  

http://t.me/ydmsjsh 

तिलक- संपादक युगदर्पण मीडिया समूह, 9971065525, 9540007991, 9910774607. 
व्याप्त #नकारात्मक मीडिया के #सकारात्मक व्यापक विकल्प का सार्थक संकल्प 
-युगदर्पण ®2001 मीडिया समूह #YDMS👑 -तिलक संपादक 

घर 4 दीवारी से नहीं 4 जनों से बनता है, परिवार उनके प्रेम और तालमेल से बनता है | आओ मिलकर इसे बनायें; - तिलक

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