घर 4 दीवारी से नहीं 4 जनों से बनता हैपरिवार उनके प्रेम और तालमेल से बनता है सभी कार्यों को जोड़ कर साधना, सफल गृहणी का काम है नौकरीवाली से पैसा बनेगा/घर नहीं प्रभाव और दुर्भाव में, आधुनिक/पारिवारिक तालमेल से उत्तम घर परिवार से देश आगे बड़े रसोई, बच्चों-परिवार की देख भाल, गृह सज्जा के बीच अपने लिए भी ध्यान देती शिक्षित नारी-(निस्संकोच ब्लॉग पर टिप्पणी/अनुसरण/ निशुल्क सदस्यता व yugdarpan पर इमेल/चैटकरें, संपर्कसूत्र- तिलक संपादक युगदर्पण 09911111611, 9999777358.

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बिकाऊ मीडिया -व हमारा भविष्य

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Monday, October 20, 2014

प्रीतम मुंडे सर्वाधिक लोकप्रिय सांसद

प्रीतम मुंडे बनी सर्वाधिक लोकप्रिय सांसद


प्रीतम मुंडेबीड युदस: स्व. गोपीनाथ मुंडे की बेटी प्रीतम मुंडे देश की सर्वाधिक लोकप्रिय सांसद बन गई हैं। कारण चाहे कुछ भी रहा हो, आकड़े कहते हैं कि उन्होंने महाराष्ट्र के बीड लोकसभा उप चुनाव में 6.96 लाख मतो के अंतर से विजय अर्जित की है। इस प्रकार प्रीतम मुंडे ने इस लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री मोदी के द्वारा बनाये गये कीर्तिमान तथा उससे पूर्व पश्चिम बंगाल में माकपा के अनिल बसु के कीर्तिमान को तोड़ दिया है।
प्रधानमंत्री मोदी मुख्य चुनाव में गुजरात के बड़ोदरा सीट से 5.70 लाख मतो के अंतर से जीते थे।वर्तमान लोस चुनाव में नरेन्द्र मोदी ने सबसे अधिक मतों के अंतर से विजय अर्जित की थी। अब प्रीतम मुंडे वर्तमान सहित, लोकसभा में सर्वाधिक मतों के अंतर से जीतने वाली सांसद बन गई हैं। 
2004 के लोकसभा चुनाव में माकपा के अनिल बसु ने आरामबाग लोकसभा सीट से 5.92 लाख मतों के अंतर से विजय अर्जित की थी, जो देश का अब तक का सबसे अधिक मतों के अंतर से जीतने का कीर्तिमान रहा है। भाजपा के दिवंगत मंत्री स्व. गोपीनाथ मुंडे की बेटी ने, अब तक के सभी कीर्तिमान  ध्वस्त कर दिये हैं। उल्लेखनीय है कि बीड लोकसभा सीट गोपीनाथ मुंडे के निधन के कारण खाली हुई थी। 
घर 4 दीवारी से नहीं 4 जनों से बनता है, परिवार उनके प्रेम
और तालमेल से बनता है | आओ मिलकर इसे बनायें; - तिलक

Friday, October 10, 2014

करवा चौथ व्रत विधि व कथा

करवा चौथ व्रत विधि व कथा

Karva Chauth Vrat Pooja Vidhi + Katha in Hindi 
श्री गणेशाय नम: 
Karwa Chauth Pooja Vidhi in Hindiकार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को करवा चौथ का व्रत किया जाता है। इस दिन विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी आयु के लिए निर्जला व्रत रखती हैं। इस वर्ष करवा चौथ का व्रत 11 अक्टूबर को रखा जाएगा। 
विधि: मान्यता है कि इस दिन विवाहित महिलाओं को निर्जला व्रत का पालन करना चाहिए। पूरे दिन व्रत रखने के बाद शाम के समय पूर्ण श्रृंगार कर करवा चौथ व्रत की कथा (Karva Chauth Ki Kahani) सुननी चाहिए। कथा के बाद किसी वृद्ध महिला को "करवा (छोटे घड़े जैसा पात्र)" देकर उनका आशीर्वाद लेना चाहिए। रात्रि के समय चन्द्रमा निकलने पर छलनी की ओट से उसे अर्घ्य देने के पश्चात् ही व्रत का पारण करना चाहिए। 
चन्द्रोदय समय (Moon Rise Time on Karva Chauth): इस दिन पूजा का शुभ मुहूर्त सायं 05 बजकर 52 मिनट से लेकर 07 बजकर 07 मिनट तक का है। इस वर्ष करवा चौथ के दिन चंद्रोदय रात 8.19 बजे होगा। 

करवा चौथ व्रत कथा (Karva Chauth Vrat Katha) 

Karva Chauth Vrat Kathaमहिलाओं के अखंड सौभाग्य का प्रतीक, करवा चौथ के दिन व्रत कथा पढ़ना, अनिवार्य माना गया है। करवा चौथकी कथाएं तो कई है, किन्तु सबका मूल एक ही है। करवा चौथ की एक प्रचलित कथा निम्न है:
करवा चौथ व्रत कथा (Karva Chauth Vrat Katha in Hindi) : महिलाओं के अखंड सौभाग्य का प्रतीक करवा चौथ व्रत की कथा कुछ इस प्रकार है- एक साहूकार के सात लड़के और एक लड़की थी। एक बार कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को, सेठानी सहित उसकी सातों बहुएं और उसकी बेटी ने भी करवा चौथ का व्रत रखा। रात्रि के समय जब साहूकार के सभी लड़के भोजन करने बैठे, तो उन्होंने अपनी बहन से भी भोजन कर लेने को कहा। इस पर बहन ने कहा- भाई, अभी चांद नहीं निकला है। चांद के निकलने पर उसे अर्घ्य देकर ही, मैं आज भोजन करूंगी। 
साहूकार के बेटे अपनी बहन से बहुत प्रेम करते थे, उन्हें अपनी बहन का भूख से व्याकुल चेहरा देख अत्यधिक दुख हुआ। साहूकार के बेटे नगर के बाहर चले गए और वहां एक पेड़ पर चढ़ कर अग्नि जला दी। घर वापस आकर, उन्होंने अपनी बहन से कहा- देखो बहन, चांद निकल आया है। अब तुम उन्हें अर्घ्य देकर भोजन ग्रहण करो। साहूकार की बेटी ने अपनी भाभियों से कहा- देखो, चांद निकल आया है, तुम लोग भी अर्घ्य देकर भोजन कर लो। ननद की बात सुनकर भाभियों ने कहा- बहन अभी चांद नहीं निकला है, तुम्हारे भाई, धोखे से अग्नि जलाकर, उसके प्रकाश को चांद के रूप में तुम्हें दिखा रहे हैं।
साहूकार की बेटी, अपनी भाभियों की बात को अनसुनी करते हुए, भाइयों द्वारा दिखाए गए चांद को अर्घ्य देकर भोजन कर लिया। इस प्रकार करवा चौथ का व्रत भंग करने के कारण विघ्नहर्ता भगवान श्री गणेश साहूकार की लड़की पर अप्रसन्न हो गए। गणेश जी की अप्रसन्नता के कारण उस लड़की का पति रुग्ण पड़ गया और घर में बचा हुआ सारा धन उसकी चिकित्सा में लग गया। 
साहूकार की बेटी को जब अपने किए हुए दोषों का पता लगा, तो उसे बहुत पश्चाताप हुआ। उसने गणेश जी से क्षमा प्रार्थना की और फिर से विधि-विधान पूर्वक चतुर्थी का व्रत शुरू कर दिया। उसने उपस्थित सभी लोगों का श्रद्धानुसार आदर किया और तदुपरांत उनसे आशीर्वाद ग्रहण किया।
इस प्रकार उस लड़की के श्रद्धा-भक्ति को देखकर एकदंत भगवान गणेश जी, उसपर प्रसन्न हो गए और उसके पति को जीवनदान प्रदान किया। उसे सभी प्रकार के रोगों से मुक्त करके धन, संपत्ति और वैभव से युक्त कर दिया।
कहते हैं इस प्रकार यदि कोई मनुष्य छल-कपट, अहंकार, लोभ, लालच को त्याग कर श्रद्धा और भक्तिभाव पूर्वक, चतुर्थी के व्रत को पूर्ण करता है, तो वह जीवन में सभी प्रकार के दुखों और क्लेशों से मुक्त होता है और सुखमय जीवन व्यतीत करता है। 
जानिए! कैसे करें, करवा चौथ का व्रत: Karwa Chauth Vrat Vidhi in Hindi
http://dharmsanskrutidarpan.blogspot.in/2014/10/blog-post.html
कभी विश्व गुरु रहे भारत की, धर्म संस्कृति की पताका;
 विश्व के कल्याण हेतू पुनः नभ में फहराये | - तिलक
घर 4 दीवारी से नहीं 4 जनों से बनता है, परिवार उनके प्रेम
और तालमेल से बनता है | आओ मिलकर इसे बनायें; - तिलक

Saturday, August 30, 2014

प्रेम ही सफल जीवन का रहस्य

प्रेम ही सफल जीवन का रहस्य
एक दिन एक महिला अपने घर के बाहर आई और उसने तीन 
संतों को अपने घर के सामने देखा। वे उसके परिचित नहीं थे।

महिला ने कहा – “कृपया भीतर आइये और भोजन करिए।”
संत बोले – “क्या तुम्हारे पति घर पर हैं?”
महिला ने कहा – “नहीं, वे अभी बाहर गए हैं।”
संत बोले – “हम तभी भीतर आयेंगे, जब वह घर पर हों।”
शाम को उस महिला का पति घर आया 
और महिला ने उसे यह सब बताया।
उस के पति ने कहा – “जाओ और उनसे कहो कि मैं घर
आ गया हूँ और उनको आदर सहित बुलाओ।”
महिला बाहर गई और एक से
 कहा 
आप उनको लेकर भीतर आयें। युवा संत बोले – 
“मैं किसी भी घर में, इन्हे साथ प्रवेश नहीं करा सकता।”
“पर क्यों?” – उस ने पूछा।
वे पुन: बोले – “मेरा नाम धन है” – फ़िर
दूसरे संतों की ओर संकेत कर के कहा – “इन
दोनों के नाम सफलता और प्रेम हैं। हममें से कोई एक
ही भीतर आ सकता है। आप घर के अन्य सदस्यों से
मिलकर तय कर लें कि भीतर किसे निमंत्रित करना है।”
महिला ने भीतर जाकर अपने पति को यह सब बताया।
उसका पति बहुत प्रसन्न हो कर बोला –
“यदि ऐसा है तो हमें धन को आमंत्रित करना चाहिए। 

हमारा घर आनंद से भर जाएगा।”
किन्तु उसकी पत्नी ने कहा – “मुझे लगता है कि हमें
सफलता को आमंत्रित करना चाहिए।”
उनकी बेटी दूसरे कमरे से यह सब सुन रही थी। 
वह उनके पास आई और बोली – “मुझे लगता है कि 
हमें प्रेम को आमंत्रित करना चाहिए। 
प्रेम से बढ़कर कुछ भी नहीं हैं।”
“तुम ठीक कहती हो, हमें प्रेम को ही बुलाना चाहिए” 
– उसके माता-पिता ने कहा।
महिला घर के बाहर गई और उसने संतों से कहा – 
“आप में से जिनका नाम प्रेम है, 
वे कृपया घर में प्रवेश कर भोजन गृहण करें।”
प्रेम घर की ओर बढ़ चले। 
अन्य दो संत भी उनके पीछे चलने लगे।
महिला ने आश्चर्य से उन दोनों से पूछा – “मैंने
तो मात्र प्रेम को आमंत्रित किया ही था।
उनमें से एक ने कहा – “यदि आपने धन और 
सफलता में से किसी एक को 
आमंत्रित किया होता तो केवल वही भीतर जाता। 
आपने प्रेम को आमंत्रित किया है। 
प्रेम कभी अकेला नहीं जाता। 
प्रेम जहाँ- जहाँ जाता है, 
धन और सफलता उसके पीछे जाते हैं।
इस कहानी को एक बार, 2 बार, 3 बार
पढ़ें ........अच्छा लगे तो प्रेम के साथ रहें, प्रेम बाटें,
प्रेम दें और प्रेम लें क्योंकि प्रेम ही सफल जीवन
का रहस्य है।
निम्न चीजो का साथ छोड दें जीवन स्वत: सफल,
सुखद, सरल, सुगम, संयम, स्वस्थ, एवम मार्यादित
बना रहेगा -
छोड दें - दूसरों को नीचा दिखाना।
छोड दें - दूसरों के धन से जलना।
छोड दें - दूसरों की चुगली करना।
छोड दें - दूसरों की सफलता पर इर्ष्या करना।
घर 4 दीवारी से नहीं 4 जनों से बनता है, परिवार उनके प्रेम
और तालमेल से बनता है | आओ मिलकर इसे बनायें; - तिलक

Saturday, August 23, 2014

नटखट पर निहाल माँ

नटखट पर निहाल माँ
यही माँ अपने नन्हे नटखट के साथ व्यस्त जीवन में आनन्द के क्षण
निकाल कर, उसकी किलकारियों से निहाल हो जाती है। 
घर 4 दीवारी से नहीं 4 जनों से बनता है, परिवार उनके प्रेम
और तालमेल से बनता है | आओ मिलकर इसे बनायें; - तिलक

Sunday, August 17, 2014

जन्माष्टमी की हार्दिक मंगलकामनायें !

जय श्री कृष्ण, 
अखिल विश्व में फैले समस्त सनातन भक्तों को (एकमात्र 16 कला सम्पूर्ण अवतार) श्री कृष्ण जन्माष्टमी की कोटि कोटि बधाई और हार्दिक मंगलकामनायें !
रोहिणी नक्षत्र में रात 12 बजे श्री कृष्ण का अवतरण होगा,  और शीघ्र ही कंस व जरासंध का नाश होगा। अत्याचारी अधर्मी कंस उ प्र पर सत्तासीन तथा उसके शर्मनिरपेक्ष समर्थक संरक्षक जरासंध। 

यहाँ से इडोनेसिया तक, जिनका इमान मूसल है वो मुसल मान हो कर भी, श्रद्धा अहिंसा व भारत भक्त सब जीवों के प्रति दयावान हों, हिंदू ही हैं। सांप्रदायिक यह नहीं, जिहादी सोच है।नकारात्मक मीडिया के सकारात्मक व्यापक विकल्प का सार्थक संकल्प -युगदर्पण मीडिया समूह YDMS- तिलक संपादक
घर 4 दीवारी से नहीं 4 जनों से बनता है, परिवार उनके प्रेम
और तालमेल से बनता है | आओ मिलकर इसे बनायें; - तिलक

Thursday, July 31, 2014

श्रावण मास और रमजान का महीना ||

शुभ प्रभात बंधुओं ,
Madhvi Gupta साभार 
श्रावण मास और रमजान का महीना ||
|| कुछ रोचक जानकारियाँ, अवश्य पढ़ें ||
|| बंधुओं एक ज्ञानवर्धक लेख .....अवस्य पढ़ें और पढ़ाएं ||
* श्रावण मास शिव जी को समर्पित है और इस पवित्र माह में पार्वती जी भगवान शंकर जी से राम जी के जीवन चरित्र को सुनती (श्रवण) करती हैं |
* इसी राम कथा के सुनने और सुनाने (श्रावण) की परिपाटी में इस पवित्र माह को"श्रावण"कहा गया है | और विश्व भर के हिन्दू इस माह में सत्य नारायण की कथा और राम चरित मानस का पाठ करते हैं |
* वास्तव में गोस्वामी जी विरचित श्री राम चरित मानस में मास परायण का विश्राम भी इसलिए ही होता है | और इस दिव्य पुस्तक का नाम भी मानस इसलिए है की अपने मानस में बसे राम के चरित्र को शंकर जी माता पार्वती को सुना रहे है |
उदहारण : चौपाई में बहुत से स्थानों पर पार्वती का संबोधन जैसे"उमा राम सुभाऊ जेहि जाना",
"उमा जे राम चरन रत बिगत काम मद क्रोध","उमा राम की भृकुटि विलासा","उमा न कछु कपि कै अधिकाई".....अदि अदि
* आप सभी पाठकों से निवेदन है की सावन के इस पवित्र माह में आप भी राम जी के जीवन को पढ़ें और जानें किसी भी भाषा में | इन्टरनेट पर भी आप को राम चरित मानस मिल जाएगा |
* आप अपने मोबाइल के एंड्राइड ऐप और एप्पल पर भी कितने एप्लीकेशन पा सकते हैं जिसे डाउनलोड कर के आप कभी भी"श्री राम चरित मानस जी"और"श्री गीता जी"को पढ़ और जान सकते हैं |
* मित्रों इस्लाम के पवित्र महीना रमजान संस्कृत शब्द"रामज्ञान"का अपभ्रंस है | और मक्का विश्वप्रसिद्ध शिव लिंग भी था जिसे"कबालेश्वर महादेव"के नाम से जानते हैं | इस कारण सावन का महत्त्व वहां भी था मुहम्मद के समय भी |
* चुकी सावन में रामायण का पाठ सनातन से चला आ रहा है तो वो इसी की नक़ल कर के"रामदान"बना लिए |
* भारत को छोड़ पूरे संसार में रमजान को"रामदान"कहते है, आप गूगल पर भी देख सकते हैं | भारत में अपनी नक़ल छुपाने को इन्होने इसे "रमजान" कर दिया | जैसा की आप सभी जानते हैं की पैगम्बर के चाचा एक हिन्दू थे और अरब में भी आर्य संस्कृति का प्रभाव बहुत था |
* मुहम्मद साहब के चाचा ने एक पुस्तक भी लिखी थी"शायर उल ओकुल"जिसमें हिन्दू संस्कृति की भूरी भूरी प्रसंसा थी | बाद में मुहम्मद के जिहादियों ने उन्हें मार दिया था |
* नक़ल यहीं बंद नहीं हुई : गर्भा बना काबा, पुराण बना कुराण, संगे अश्वेत बना संगे अस्वाद, हमारा मलमास बना सफ़र मास, रवि से उनका रबी महिना, उनका ग्यारहवी शरीफ हमारे एकादशी (11) की ही नक़ल है | गृह से ही उनका गाह शब्द बना ईदगाह , दरगाह |
* उनका"नमाज"भी संस्कृत के नमत शब्द से बना है जिसका अर्थ है झुकना | नमस्ते शब्द भी इसी से निकला है |
* दिन में ५ बार नमाज हमारे वेदों के"पञ्च महा यज्ञ"की ही नक़ल है |
* मुसलामानों का त्यौहार "शब्बेरात"शिवरात्री का ही अपभ्रंस है |
*नमाज के पहले ५ अंगों को धुलना वेदों के"शरीर शुद्ध्यर्थं पंचांग न्यासः"का ही नियम है |
* ईद उल फितर हिन्दुओं का पित्री पक्ष (ईद उल पित्र )ही है | और ईद उल फ़ित्र में मुसलमान अपने पूरकों को ही याद करते हैं |
इस नक़ल की प्रक्रिया लेखन इतना लम्बा है ......पूरी किताब तैयार हो सकती है |

चलते चलते : कितने हिन्दू भाइयों को ये भी न पता होगा की पैगम्बर सिकंदर के ५०० साल बाद पैदा हुए थे और इसका अर्थ हुआ की चन्द्रगुप्त मौर्य के लगभग ४०० साल बाद | अभी बच्चा है ये.... जिसकी नक़ल करता है उसी को हेकड़ी भी दिखता है |
"वयं राष्ट्रे जागृयाम"......
आप सभी को श्रावण मास की शुभ कामनाएं |..
कभी विश्व गुरु रहे भारत की, धर्म संस्कृति की पताका;
 विश्व के कल्याण हेतू पुनः नभ में फहराये | - तिलक
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Thursday, July 10, 2014

राहत का बजट -अच्छे दिनों का शुभारम्भ

राहत का बजट -अच्छे दिनों का शुभारम्भ 
सीमित आय असीमित कष्ट से ऐतिहासिक राहत 
युगदर्पण समाचार वित्त मंत्री अरुण जेटली ने अपने बजट प्रस्तावों में 2.5 लाख तक की वार्षिक आय को करमुक्त करने का प्रस्ताव किया है। वरिष्ठ नागरिकों की 3 लाख रुपये तक की आय करमुक्त होगी। जेटली ने अपने बजट प्रस्तावों से करदाताओं को पाँच हजार रुपए से अधिक की राहत दी है। उन्होंने कहा कि विभिन्न योजनाओं में अब 1.5 लाख रुपये तक के निवेश पर कर में छूट मिलेगी। अभी यह सीमा 1 लाख रुपये है। 
सीमित आय वर्ग के कर्मियों पर भी लगाये जाने वाले कर बोझ के असीमित कष्ट से दबे इस वर्ग की, वर्षों से लम्बित इस मांग को संप्रग सरकार ने अन्त तक पूरा नहीं किया था, मोदी की सरकार ने अपने प्रथम बजट में ही, आशा से भी 50 हजार अधिक ऐतिहासिक राहत दे कर, अच्छे दिनों का शुभ संकेत दे दिया है। 
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